चंदन पाण्डेय समकालीन विषयों पर बेहतरीन गद्य लिख रहे हैं। उनकी पुस्तक वैधानिक गल्प एक थ्रिलर की तरह बुना गया गंभीर गद्य है। इसमें वह घटनाएँ नजर आती हैं, जो आज के दौर का सच है।
अफ़ीम युद्ध चीन इतिहास का वह कालखंड है, जिसे चीन शर्मिंदगी के सौ साल (Century of shame) में गिनता है। चीन में हुई क्रांति से लेकर पश्चिम के प्रति शंका में इसका बड़ा योगदान है। आधुनिक चीन इतिहास के इस खंड में चर्चा होगी दूसरे अफ़ीम युद्ध की।
कुछ स्थानों पर ऐसा प्रतीत होता है कि मोहम्मद अली जिन्ना और अंबेडकर की अपनी-अपनी दृष्टियों में समानताएँ और अपूर्णता एक जैसी हैं। लेखक अंबेडकर को एक संगठन व्यक्ति के रूप में असफल दिखाते हैं।
शर्मिष्ठा की कथा कई बार कई दृष्टियों से दोहरायी गयी है। इस कथा कि ख़ासियत यह है कि इसे किसी कोण से आँका जा सकता है। अणुशक्ति का कोण एक पौराणिक कथा को आधुनिक दृष्टि से देखना है।
चीन में ईसाई धर्म का प्रवेश कई बार हुआ, लेकिन एक घटना ऐसी है, जो चीन के इतिहास का रक्तरंजित पन्ना है। जब चीन में एक ऐसी अलहदा ईसाईयत आयी जिसने उसकी नींव हिला कर रख दी। आधुनिक चीन इतिहास के प्रथम खंड में चर्चा होगी ऐसे ही एक विद्रोह की।
इंद्र-कथा में ट्रांस-जेंडर, समलैंगिकता, और यहाँ तक कि ऐसे संदर्भ मिलेंगे कि गर्भधारण अगर पुरुष करे तो क्या हो? स्त्री अपनी इच्छाओं के प्रति कितनी स्वतंत्र है? यह प्रश्न भी है कि अगर अ-ब्राह्मण शास्त्रज्ञ बन जाएँ, तो क्या हो
कालीकट से ठुकराए जाने के बाद वास्को डी गामा के पास लौट जाने के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं था। लेकिन लौटते हुए किस्मत ने उसे ऐसी जगह ला दिया, जो पुर्तगालियों का गढ़ ही बन गया। शृंखला के आखिरी खंड में गोवा के उस जमीन का विवरण है, जहाँ वे भूलते-भटकते हुए पहुँच गए।
पुर्तगालियों के पास देने के लिए कुछ नहीं था। वे अरबी व्यापारियों से संपत्ति के मामले में कमजोर दिखे। लेकिन, कहीं न कहीं यह आकलन अधूरा था और भविष्य में इसकी क़ीमत चुकानी पड़ी। इस खंड में उस घटनाक्रम का विवरण है, जब वास्को डी गामा को कालीकट छोड़ कर भागना पड़ा।
वास्को डी गामा का भारत के पश्चिमी समुद्री तट पर आना यूरोप और भारत के इतिहास का महत्वपूर्ण बिंदु है। भारत कई मामलों में उस समय यूरोप से अधिक समृद्ध था। वहीं यूरोपीय अपने कदम बहुत संभाल कर रख रहे थे। इस खंड में उसी आरंभिक संवाद का विवरण है।
अफ़्रीका के तटों पर इस्लाम राज था। वास्को डी गामा को लिए यह चुनौती थी कि भारत पहुँचने में मदद कैसे ली जाए। कहीं लड़ाई, कहीं कूटनीति, और कहीं झूठे वादे उसका पथ प्रशस्त कर रहे थे। भारत का रास्ता दिखाने वाला सबसे उचित व्यक्ति आख़िर कौन हो सकता था? तीसरे खंड में पुर्तगाली और अरबी लोगों की मुलाक़ात पर बात