वह आवेदन जो रिजेक्ट हो गया

Gandhi scholarship poster
1888 ई. में उन्नीस वर्ष के मोहनदास लंदन पहुँच तो गए पर उन्हें लग गया कि लंदन के लायक उनके पास धन नहीं, तो छात्रवृत्ति की अर्जी देनी शुरू की। हालांकि यह छात्रवृत्ति उन्हें मिली नहीं।
Mohandas Gandhi’s application for scholarship. Translated by Praveen Jha

आवेदन पत्र (छात्रवृति)

दिसंबर, अठारह सौ अठासी, लंदन

आदरणीय सर,

आप मुझे उस चिट्ठी से पहचान लेंगें, जो मैनें आपको भारत में दी थी, और आपने कहा था कि सँभाल कर रखेंगें।

उस वक्त आपसे मैनें कुछ आर्थिक सहायता की बात की थी, जो मुझे लंदन आने के लिए चाहिए थे। पर आप उस वक्त व्यस्त थे, और हमारी बात ठीक से नहीं हो पाई।

मैं भी जल्दी में था, और कम पैसों में ही जैसे-तैसे 4 सितंबर को लंदन के लिए निकल पड़ा। मेरे पिता ने मरणोपरांत हम तीनों भाईयों के लिए बहुत कम धन छोड़ा। मेरे भाई ने बड़ी कठिनता से मुझे 666 पाउंड इंतजाम कर दिए, जिससे कि मुझे तीन साल लंदन में निकालने हैं। मैं यहाँ कानून की पढ़ाई के लिए आया हूँ। मुझे पता था कि इंग्लैंड में शिक्षा और रहन-सहन मँहगा है। यहाँ आकर तो यह और भी मँहगा लग रहा है।

यहाँ रहने के लिए मुझे कम से कम और 400 पाउंड की जरूरत है। मैं पोरबंदर का वासी हूँ तो मदद के लिए वहीं देखता हूँ।

जब स्वर्गीय महाराज राना साहेब थे, तब शिक्षा पर कुछ खास बल नहीं दिया गया था। अब अंग्रेज प्रशासन से तो शिक्षा के विस्तार की अपेक्षा की जा सकती है।

उम्मीद है कि आप मुझे आर्थिक सहायता देंगें। मेरे भाई लक्ष्मीदास गांधी आपसे प्राप्त कर लेंगें।

आपका आभारी
मोहनदास करमचंद गांधी

पोरबंदर एस्टेट एजेंट फ्रेडरिक लिली के नाम चिट्ठी का ड्राफ्ट, जो भाई लक्ष्मीदास गांधी को भेजा गया

पढ़े विद्यार्थी मोहनदास का पहला साक्षात्कार Click here to read first interview of student Mohandas Gandhi

Author Praveen Jha translates scholarship application of Gandhi addressed to Porbandar estate

2 comments
  1. Sir Mahatma Gandhi g k daily routine aur punctuality k bare me v ek article likhiye.. Sambhav ho to New year se pahle..! 🙏

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