प्रवीण कुमार झा कथेतर रुचि के लेखक हैं। गिरमिटिया इतिहास पर उनकी शोधपरक पुस्तक ‘कुली लाइंस’ चर्चित रही। संगीत इतिहास पर आधारित पुस्तक ‘वाह उस्ताद’ को कलिंग लिट्रेचर फ़ेस्टिवल 2021 ने ‘बुक ऑफ द यर’ से सम्मानित किया। उन्होंने इतिहास पुस्तकों के अतिरिक्त लघु यात्रा-संस्मरण भी लिखे हैं और उनके स्तंभ प्रमुख पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं। प्रवीण का जन्म बिहार में हुआ और वह भारत के भिन्न-भिन्न स्थानों से गुजरते हुए अमेरिका और यूरोप में रहे। वह सम्प्रति नॉर्वे में विशेषज्ञ चिकित्सक हैं।
चीन में हुए बॉक्सर विद्रोह को दोनों पक्षों ने क्रूर कहा। उन्नीसवीं सदी के अंत में चीन में इतना रक्त बहा कि चीन एक बार फिर घुटनों पर आ गया। इस खंड में चर्चा है उसी क्रांति की
मेरठ किसान सत्याग्रह आज तक के सबसे लंबे सत्याग्रहों में है। इसी से महेंद्र सिंह टिकैत को वह ज़मीन भी मिली जिसके बदौलत वह दिल्ली कूच कर सके। इस खंड में चर्चा उसी आंदोलन की
जब गांधी पहली बार दक्षिण अफ़्रीका के नटाल कचहरी गए तो उन्हें पगड़ी उतारने कहा गया। इस घटना की खबर वहाँ अखबार में छपी जिसका शीर्षक था The Unwelcome Visitor। यह उसी खबर और गांधी के उत्तर का अनुवाद है।
महेंद्र सिंह टिकैत की लम्बे भाषणों में रुचि नहीं थी। उनका तरीक़ा था कि बात ऐसे हो जैसे गाँव के चौपाल में होती है। उन्होंने किसानों को बिना किसी राजनीतिक दल के सहारे अपनी बात रखने का गँवई हुनर दिया। इस खंड में चर्चा होगी ऐसे ही एक आरंभिक आंदोलन की।
भारत जैसे विशाल देश के किसानों को एक छत्र में लाना लगभग असंभव है। ऐसे प्रयास आज़ादी के पहले से होते रहे, किंतु सफल नहीं हुए। इस खंड में चर्चा होगी उन संगठनों की
किसान आंदोलनों का लंबा इतिहास रहा है। अस्सी के दशक में एक नाम उभरे – महेंद्र सिंह टिकैत। एक समय उन्होंने दिल्ली हिला कर रख दिया था। इस शृंखला के पहले खंड में किसान आंदोलनों का फ़्लैशबैक
25 वर्ष के बैरिस्टर मोहनदास करमचंद गांधी द्वारा ब्रिटिश सरकार को लिखी पहली खुली चिट्ठी विवादित रही। उन्होंने अफ़्रीकी मूल के लोगों को जंगली कहा। लेकिन, यह सत्याग्रह के आरंभिक दस्तावेजों में है।
चीनी राजतंत्र ने आख़िरी बार वापस खड़े होने की कोशिश की। उन्होंने ऐसे सुधार लाए जो चीन का भविष्य बदल सकते थे। लेकिन, नियति उन्हें किसी और ही दिशा में ले गयी। सौ दिनों का सुधार फ्लॉप रहा। चीन शृंखला के इस खंड में बात होगी उस घटनाक्रम की