Boxer rebellion China
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चीन खंड 5 – आदर्श मुक्केबाज़

चीन में हुए बॉक्सर विद्रोह को दोनों पक्षों ने क्रूर कहा। उन्नीसवीं सदी के अंत में चीन में इतना रक्त बहा कि चीन एक बार फिर घुटनों पर आ गया। इस खंड में चर्चा है उसी क्रांति की
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Mahendra Singh Tikait
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किसान खंड 4- मेरठ

मेरठ किसान सत्याग्रह आज तक के सबसे लंबे सत्याग्रहों में है। इसी से महेंद्र सिंह टिकैत को वह ज़मीन भी मिली जिसके बदौलत वह दिल्ली कूच कर सके। इस खंड में चर्चा उसी आंदोलन की
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Unwelcome Visitor Gandhi Poster
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नटाल का अनिष्ट आगंतुक (Unwelcome visitor)

जब गांधी पहली बार दक्षिण अफ़्रीका के नटाल कचहरी गए तो उन्हें पगड़ी उतारने कहा गया। इस घटना की खबर वहाँ अखबार में छपी जिसका शीर्षक था The Unwelcome Visitor। यह उसी खबर और गांधी के उत्तर का अनुवाद है।
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Mahendra Tikait meeting poster
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किसान खंड 3 – भाई! ऐसी है बात

महेंद्र सिंह टिकैत की लम्बे भाषणों में रुचि नहीं थी। उनका तरीक़ा था कि बात ऐसे हो जैसे गाँव के चौपाल में होती है। उन्होंने किसानों को बिना किसी राजनीतिक दल के सहारे अपनी बात रखने का गँवई हुनर दिया। इस खंड में चर्चा होगी ऐसे ही एक आरंभिक आंदोलन की।
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Mahendra Tikait addressing farmers
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किसान खंड 2- भारत के किसानों! एक हों!

भारत जैसे विशाल देश के किसानों को एक छत्र में लाना लगभग असंभव है। ऐसे प्रयास आज़ादी के पहले से होते रहे, किंतु सफल नहीं हुए। इस खंड में चर्चा होगी उन संगठनों की
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Mahendra Tikait Poster
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किसान खंड 1 – प्रधानमंत्री ने पैसे खाए हैं?

किसान आंदोलनों का लंबा इतिहास रहा है। अस्सी के दशक में एक नाम उभरे – महेंद्र सिंह टिकैत। एक समय उन्होंने दिल्ली हिला कर रख दिया था। इस शृंखला के पहले खंड में किसान आंदोलनों का फ़्लैशबैक
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Open Letter Gandhi Poster
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खुली चिट्ठी में पूछा- क्या यही आपके संस्कार हैं?

25 वर्ष के बैरिस्टर मोहनदास करमचंद गांधी द्वारा ब्रिटिश सरकार को लिखी पहली खुली चिट्ठी विवादित रही। उन्होंने अफ़्रीकी मूल के लोगों को जंगली कहा। लेकिन, यह सत्याग्रह के आरंभिक दस्तावेजों में है।
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Temple of Heaven Poster
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चीन खंड 4 – ईश्वर को अंतिम प्रणाम

चीनी राजतंत्र ने आख़िरी बार वापस खड़े होने की कोशिश की। उन्होंने ऐसे सुधार लाए जो चीन का भविष्य बदल सकते थे। लेकिन, नियति उन्हें किसी और ही दिशा में ले गयी। सौ दिनों का सुधार फ्लॉप रहा। चीन शृंखला के इस खंड में बात होगी उस घटनाक्रम की
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Mallikarjun Mansur Poster
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स्वरों का ख़ज़ाना नहीं, जलप्रपात थे मल्लिकार्जुन मंसूर

पु ला देशपाण्डे और मल्लिकार्जुन मंसूर का अंतरंग संबंध रहा। उनके संगीत के विषय में यह लेख अद्वितीय है।
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