प्रवीण कुमार झा कथेतर रुचि के लेखक हैं। गिरमिटिया इतिहास पर उनकी शोधपरक पुस्तक ‘कुली लाइंस’ चर्चित रही। संगीत इतिहास पर आधारित पुस्तक ‘वाह उस्ताद’ को कलिंग लिट्रेचर फ़ेस्टिवल 2021 ने ‘बुक ऑफ द यर’ से सम्मानित किया। उन्होंने इतिहास पुस्तकों के अतिरिक्त लघु यात्रा-संस्मरण भी लिखे हैं और उनके स्तंभ प्रमुख पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं। प्रवीण का जन्म बिहार में हुआ और वह भारत के भिन्न-भिन्न स्थानों से गुजरते हुए अमेरिका और यूरोप में रहे। वह सम्प्रति नॉर्वे में विशेषज्ञ चिकित्सक हैं।
क्या पूरी दुनिया के पूर्वज एक ही थे? क्या सभी मानव अफ़्रीका से आए? यह बात हमें कैसे पता लगेगी? मानव इतिहास पर आधारित इस शृंखला के पहले खंड में इन प्रश्नों के हल ढूँढते हैं।
विवेक शुक्ल दिल्ली के चलते-फिरते ज्ञानकोश हैं। इस पुस्तक में उन्होंने गांधी और दिल्ली के संबंध को टटोला है। ऐसा लगता है जैसे हर चीज जो देख रखी है, उसमें बहुत कुछ देखना बाकी है।
लाला अमरनाथ भारतीय क्रिकेट के आदिपुरुष की तरह नज़र आते हैं। भले उनसे पहले और बाद में एक से एक क़द्दावर खिलाड़ी हुए, मगर लाला की छवि कायम है। डॉन ब्रैडमेन को हिट विकेट आउट करने वाले पहले खिलाड़ी की झोली में ऐसी कई चीजें है जो पहली बार मिली
ट्रांसवाल ऐडवर्टाइज़र में खबर छपी-‘एक भारतीय बैचलर ऑफ़ आर्ट्स मि. पिल्लई को डर्बन में एक फुटपाथ से धक्का दे दिया गया’। दरअसल यह मिस्टर पिल्लई कोई और नहीं, मोहनदास करमचंद गांधी थे। इस घटना के साथ विरोध का एक सिलसिला शुरू हुआ। उन चिट्ठियों को यहाँ पढ़ा जा सकता है
गांधी के लिए लंदन से बैरिस्टर होना नौकरी के लिए काफ़ी नहीं था। उन दिनों बंबई में ऐसे बैरिस्टरों की कमी नहीं थी। जाति से बहिष्कृत और पैसों से तंग गांधी की कुछ चिट्ठियाँ यहाँ पढ़ी जा सकती है।
बौद्ध धर्म समय के साथ खर्चीला और आडंबरी होता गया। लेकिन इससे संस्कृति में लोसार महोत्सव, संगीत और तुमचूर जैसी चीजें आयी। कभी रेशम मार्ग से जुड़े लद्दाख में आज भी ऐसे संसाधन छुपे हैं, जिस पर नज़र नहीं पड़ी। संस्मरण के आखिरी खंड में इन पर बात।
लद्दाख के लोग सदियों से सत्तू खाते रहे हैं, जिसके पीछे वहाँ की जलवायु और जीवनशैली का रोल है। पेरिस सिन्ड्रोम, भगा कर शादी, और मैगनेटिक हिल के अंधविश्वास की बात इस खंड में
1971 के युद्ध के सीजफायर के बाद पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्र का एक बाल्टिस्तानी गाँव टुरटुक भारत का हिस्सा बन गया। वे सांस्कृतिक रूप से लद्दाख से ही जुड़े थे। इस खंड में वहाँ के याग्गो राजा से मुलाक़ात
पाकिस्तान और चीन, दोनों सीमाओं पर होने के कारण लद्दाख ने कई युद्ध देखें हैं। उनकी स्मृतियाँ पूरे लद्दाख में पसरी हुई हैं। यात्रा संस्मरण के इस खंड में उस पर चर्चा
लद्दाख में बौद्ध धर्म की महायान और वज्रयान परंपरा के आने ने बुद्ध की मूल शिक्षा का कायाकल्प कर दिया। मूर्ति-पूजा के निंदक की विशाल चमकदार मूर्तियाँ पूरी दुनिया में दिग्विजय करने लगी। इस खंड में हीनयान, महायान और वज्रयान के इस यात्रा की चर्चा