प्रवीण कुमार झा कथेतर रुचि के लेखक हैं। गिरमिटिया इतिहास पर उनकी शोधपरक पुस्तक ‘कुली लाइंस’ चर्चित रही। संगीत इतिहास पर आधारित पुस्तक ‘वाह उस्ताद’ को कलिंग लिट्रेचर फ़ेस्टिवल 2021 ने ‘बुक ऑफ द यर’ से सम्मानित किया। उन्होंने इतिहास पुस्तकों के अतिरिक्त लघु यात्रा-संस्मरण भी लिखे हैं और उनके स्तंभ प्रमुख पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं। प्रवीण का जन्म बिहार में हुआ और वह भारत के भिन्न-भिन्न स्थानों से गुजरते हुए अमेरिका और यूरोप में रहे। वह सम्प्रति नॉर्वे में विशेषज्ञ चिकित्सक हैं।
वी एस नायपॉल के पूर्वज भारत से गिरमिटिया मज़दूर बन कर ट्रिनिडाड ले जाए गए थे। नोबेल साहित्य पुरस्कार प्राप्त होने पर अपने भाषण में उन्होंने अपनी भारतीय जड़ों को अपने ही अंदाज़ में याद किया।
In Europe, all the hospitals and poly-clinics are connected by a health link software, with facility to transmit images, prescriptions, and patient history
चौदहवाँ दिन ‘काली चौदश’ है। इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठना होता है, और आलसी लोग भी इस दिन सुबह जरूर नहाते हैं। माँएँ बच्चों को जबरदस्ती उठा कर ठंड में नहलातीं हैं। कहते हैं, इस रात श्मशान में भूत घूमने आते हैं
यह मोहनदास करमचंद गांधी के सबसे पुराने डायरी में है, जो लंदन डायरी कहलायी। यह 19 वर्ष की उम्र में लिखी गयी। इसमें एक विद्यार्थी गांधी हैं, जो दुनिया को कम समझते थे। जो पहली बार लिफ़्ट को देख कर चौंक गए कि कमरा चल कैसे रहा है।