प्रवीण कुमार झा कथेतर रुचि के लेखक हैं। गिरमिटिया इतिहास पर उनकी शोधपरक पुस्तक ‘कुली लाइंस’ चर्चित रही। संगीत इतिहास पर आधारित पुस्तक ‘वाह उस्ताद’ को कलिंग लिट्रेचर फ़ेस्टिवल 2021 ने ‘बुक ऑफ द यर’ से सम्मानित किया। उन्होंने इतिहास पुस्तकों के अतिरिक्त लघु यात्रा-संस्मरण भी लिखे हैं और उनके स्तंभ प्रमुख पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं। प्रवीण का जन्म बिहार में हुआ और वह भारत के भिन्न-भिन्न स्थानों से गुजरते हुए अमेरिका और यूरोप में रहे। वह सम्प्रति नॉर्वे में विशेषज्ञ चिकित्सक हैं।
गांधी ने लंदन में विद्यार्थी जीवन में भारतीय आहार पर भाषण दिया। इसमें सरल भाषा में भारत के अनाज और फल विदेशियों को समझाया। साथ-साथ भोजन बनाने की विधि भी।
एक शाम को पेग लगाते हुए महेंद्र कपूर को राज ने कहा कि तुम्हें बंबई में अपने फ़िल्म में गीत दूँगा। उन्होंने कहा कि आप बड़े आदमी हैं, बंबई जाकर भूल जाएँगे। राज कपूर ने तुरंत जलती सिगरेट लेकर अपनी हथेली पर बुझाया, और कहा कि अब यह दाग़ मुझे याद दिलाता रहेगा कि तुम्हें एक गीत देना है।
सुभाष चंद्र बोस की छवि एक अनुशासन से बँधे आज़ाद हिंद फ़ौज के मुख्य कमांडर की तरह बनती है। उनसे यह उम्मीद नहीं की जाती कि वह संगीत जैसी नाज़ुक चीज से रिश्ता जोड़ेंगे। मगर नेताजी ने न सिर्फ़ संगीत में रुचि रखी, बल्कि म्यूज़िक डायरेक्शन भी किया। पढ़ें उनसे जुड़े गीत
जहाँ अभिनेताओं में हर किसी के लिए अलग गायक थे, जैसे राज कपूर के लिए मुकेश; अभिनेत्रियों में चाहे नरगिस हों, मीना कुमारी या मधुबाला, गायिका लता ही रहेंगी
गाँव के बुजुर्गों को भी ठीक-ठीक याद नहीं, ये रंजिश कब शुरू हुई। दादा-परदादा के भी पहले की कहानी है। कन्नू-तम्मू के लकड़दादों के जमाने की। अंग्रेजों के जमाने की
इसी दौर में पहली बार शायद हैदर साहब लाहौर से ढोल लेकर पंजाबी लोकगीत लेकर आए, और धीरे-धीरे कई पंजाबी धुनें फ़िल्मों में आती गयी। लेकिन मेरा मानना है कि अगर गिनती की जाए तो बिहार-यूपी के लोकगीतों की संख्या कहीं ज्यादा होगी।