Read More

बैजनाथ मिश्र ‘बैजू’: जो बाँवरे नहीं थे

बैजू अपने बेटे को ढूँढने कश्मीर की ओर पदयात्रा पर निकले। वहीं रास्ते में होशियारपुर जिले के एक गाँव में वह ठहरे, जो उनके नाम पर ‘बजवाड़ा’ नाम से मशहूर हुआ
Read More
Read More

ध्रुपद और कच्छप वीणा

मैं विज्ञान से जुड़ा व्यक्ति हूं और यह कल्पना करता रहता हूं कि विश्व का ऐसा कौन-सा वाद्य-यंत्र होगा जो मनुष्य के ‘वोकल कॉर्ड’ (स्वर-रज्जु) के सबसे करीब होगा. जिसके तार छेड़े जाएं तो गायन के समानांतर हो
Read More
Read More

कौन सा यंत्र बनता है बंदूक की नाल से?

एक दिन बाबा मैहर के राजा साहब के पास बैठे थे। वह शिकार के लिए बंदूकों की नली साफ करवा रहे थे। कई बंदूकों में जंग लग गयी थी, उसे किनारे रखवा देते। बाबा ने कहा, “महाराज! इन बंदूक की नलियों को आप मुझे दे दें।”
Read More
Read More

रात के हमसफर

महफ़िलों की शुरुआत इसी राग से अक्सर होती है और यह रागों का राजा है। शांत रस का राग है तो जाहिर है यह मन के शांत कर देता है।
Read More
Read More

दिन के राग

शाम को यूँ ही क्षितिज पर सूर्य को अस्त होते देखना और सुरबहार की झण्कार सुनना यूँ लगता है कि गायों का झुंड खेतों से एक धुन में वापस लौट रहा है
Read More
Morning Raga Poster
Read More

कौन से राग दे सकते हैं बेहतरीन सुबह?

सुबह आखिर कौन से राग सुने जाएँ कि दिन खूबसूरत बन जाए? इस लेख में चर्चा है ऐसे ही कुछ रागों की, जिससे आप प्लेलिस्ट बना सकते हैं।
Read More
Read More

विजय घाटे

एक दिन वसंत राव देशपांडे जी के पास ले गए, तो उन्होंने कहा, “यह क्या कर रहे हो? हुनर कोई नुमाइश की चीज है कि बच्चा बढ़िया ढोल पीटता है? दो-चार लोगों ने वाह-वाह क्या कर दी, खुश हो गए? हुनर है तो उसे तराशो! दुनिया में भीड़ बहुत है, ऐसे हज़ारों बच्चे घूम रहे हैं। इसे बाक़ायदा तालीम दो, और यह नुमाइश बंद करो!”
Read More
Read More

कैवल्य कुमार गुरव

“तुम्हें कहाँ गाना है? यह तो तुम्हारे अंदर बसा धारवाड़ गाएगा। बस अब्दुल करीम ख़ान साहब की एक बात ध्यान रखो कि जब मंच पर बैठोगे, तब तुम राजा हो। और जब मंच से उतरोगे तो निरीह। अपना अभिमान और अपनी असीम शक्ति मंच तक ही रहेगी।”
Read More
Read More

जो दायरों में फँसा, वह भीमसेन जोशी न बन सका

पंडित जी को मैंने करीब से देखा है, और उनके गायकी से पहले ही उनके चेहरे पर भाव आ जाते हैं। उनकी भृकुटी, उनकी आँखें, उनके होंठ, उनका गला सब भिन्न-भिन्न रसों के हिसाब से बदल जाते हैं
Read More
Read More

सावन की फुहार, गाओ मल्हार!

आप इसे इत्तेफाक ही कहेंगे लेकिन वाकई इसको दो बारी बजाते समय बारिश हुई और एक समय यह मैं जंगल के बीच खुले आसमान में बजा रहा था और द्रुत के समय बारिश होने लगी। यह अनुभव अलौकिक था, जैसे किसी वैज्ञानिक का प्रयोग सफल हो गया हो।
Read More